भारत सरकार के नाम कश्मीर मुद्दे को लेकर,एक नागरिक का खुला पत्र !

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भारत के स्विट्ज़रलैंड कहे जाने वाले और अद्भुत सौन्दर्य के धनि राज्य जम्मू कश्मीर में गत कई दिनों से मरने और मारने का खेल जारी है और व्यापक रूप से यों भी कह सकते हैं की पिछले 60 वर्षो से जारी है ! इस राज्य के बारे में तमाम देश दो धडो में विभाजित है ! कोई सरहाना करता नजर आ रहा है तो कोई निंदा , कोई अच्छा बता रहा है तो कोई गलत , कोई किसी की खामी निकल रहा है तो कोई खूबियाँ गिना रहा है , कोई फोटो पोस्ट कर रहा है तो कई उसे लाइक और डिसलाइक कर रहे है ! मगर मैं इन तमाम घटनाओं से बेहद आहत हूँ ! क्या भारतवासियों की क्रिया या प्रतिक्रिया से या यूँ कहें की भारत सरकार के तत्कालीन समाधान से इस प्राचीन और विराट समस्या का हल संभव है ? मुझे लगता है की ऐसा कतई नहीं है ! भारत की एकता और अखंडता को यथावत रखने के लिए दीर्घकालिक समाधानों का समय आ गया है ! हमें आरोप – प्रत्यारोप , पडोसी देश की साजिश इत्यादि बातों को छोड़कर समाधान खोजना होगा और विजेता भी वही होता है जो समस्याओ का राग न अलाप कर समाधान की बात करता है ! हर सरकारें कहती है कि अभी उचित समय नहीं आया है अतः भारत सरकार को देश के सामने आकर अब ये जवाब देना होगा कि आखिर वह उचित समय कब आयेगा ? साथ ही यह भी जवाब देना होगा कि धारा 370 जब अस्थाई है तो अप्रत्यक्ष रूप से वह स्थाई क्यूँ बन गयी है ? इस स्थाई और अस्थाई टर्म को भी भारत की सरकार को परिभाषित करना होगा ! देश अब और इन्तजार के मूड में नहीं है ! आखिर आजादी के बाद देश पर शासन करने वाली सभी सरकारों के सामने वे कौन सी चीज़ें हैं जो इस अस्थाई प्रावधान को समाप्त करने से रोकती हैं ? उन समस्त कारणों का जवाब अब देश को दिया जाना चाहिए ! एकतरफ़ा कश्मीरियों पर दोष मढना भी मुझे तो पक्षपात नजर आता है , असली दोष आजादी के बाद की समस्त सरकारों का है जिन्होंने कश्मीर के नागरिको को ये सोचने का समय दिया कि कश्मीर उनकी बपौती है , कश्मीर भारत से अलग है , कश्मीर की भारत से अलग कुछ सम्प्रभुतायें हैं जिसमे भारत की दखल अवैध है ! आखिर कश्मीरी कश्मीर को अपना निजी देश मान बैठे हैं ! क्यों ? ये जवाब भी भारत की तत्कालीन सरकार के हवाले से दिया जाना चाहिए और साथ ही जड़ों में जाकर इस वटवृक्ष रुपी चुनौती का हल खोजना चाहिए क्योंकि सतही समाधान देश के लिए हर आयाम से नुकसानदायक है !

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अंत में मै यही कहना चाहूँगा कि वर्तमान भारत की केन्द्रीय सरकार के पास बेहद अच्छा बहुमत है साथ ही कथित राज्य में भी सरकार में वे हिस्सेदार हैं ! इसके अलावे ये अपने को राष्ट्रवादी भी तो कहते हैं , तो जाहिर है देश की जनता की सहानुभूति भी इनके पास है ! अतः वर्तमान सरकार के पास इस ऐतिहासिक समस्या का हल निकालने का खूबसूरत और उचित समय है ! एक जज्बाती अपील और है ; कि आजादी के बाद बहुत सी सरकारें आई हैं-गयी हैं और जब तक ये पृथ्वीमंडल रहेगा नजाने कितनी सरकारें आएँगी और कितनी जाएगी मगर ये देश बचना चाहिए , इस देश की एकता और अखंडता पर आंच नहीं आनी चाहिए ! दो राय नही कि वर्तमान सरकार को इतिहास ने ये शुभ अवसर दिया है अतः राजनीतिक हितों और व्यक्तिगत स्वार्थो से ऊपर उठकर कश्मीर की विराट समस्या का हल निकलना चाहिए , इससे देश तो बचेगा ही साथ ही आने वाली नस्लें वर्तमान सरकार का ऋण कभी अदा नही कर पाएंगी !

जय हिन्द – जय भारत !

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