दिल्ली के युवक ने झगडे के दौरान गाली देने से किया इंकार,परिवार ने जायदाद से किया बेदखल ।

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कल मंगल की रात को दिल्ली के लक्ष्मीनगर इलाक़े मे एक ऐसी सनसनीखेज घटना घटी , सब कुछ अमंगल हो गया, जिससे दिल्ली की छवि पर गहरा धब्बा लग गया। इस हैरतअंगेज़ घटना के दौरान CA के फाइनल की तैयारी कर रहे 44 वर्षीय नौजवान मनोज को गंभीर चोटें आईं हैं । हमारे संवादाता क्रीमू ने अपने चरसी मित्रों को मलाना माल का लालच देकर इस मामले की सभी जानकारी एकत्रित की व स्वयं तहकीकात की और पीड़ित मनोज के घनिष्ठ मित्र संजू का इंटरव्यू लिया जो की कुछ यूं है :-
क्रीमू – संजू जी ऐसा क्या हुआ कि आपने अपने जिस दोस्त को लड़ाई में मदद करने के किये बुलाया था उसी को अपने दुश्मन के संग मिलकर पीट दिया ?
संजू – उस साले ने काम ही ऐसा किया था, पूरी दिल्ली की नाक कटवा दी, किसी को मुँह दिखाने के लायक नहीं छोड़ा!
क्रीमू ( खैनी रगड़ते हुए ) – संजू जी, जरा विस्तार में बताएँगे ?
संजू – हम लोग हर बार की तरह CA finals का एग्जाम देकर लौट रह थे चूँकि मुझे लौटने की जल्दी थी इसीलिए मैं अपनी स्कूटी लेकर दोस्तों से पहले निकल आया रास्ते में पेपर देकर लौट रहे एक अन्य बैचमेट सनी ने मुझसे लिफ्ट मांगी चूँकि मैं जल्दी में था इसिलए अनसुना करके आगे बढ़ गया इतने में सनी ने मुझे ” ओए फेलियर ” कहकर आवाज़ लगायी जिससे आसपास खड़े सब बच्चे हँसने लगे , जिन कॉरेस्पोंडेंस के बच्चों पर मैं रौब जमा के अपना काम करवाता था उनके सामने मेरी इज़्ज़त का साकीनाका कर दिया साले ने !
क्रीमू – फिर क्या हुआ ?
संजू – होना क्या था हम दोनों में तूतू-मैंमैं से बात शुरू होकर हाथापाई तक आ गयी व् दोनों ने एक दूसरे को शाम को देख लेने की धमकी दी , जिसके परिणामस्वरुप मैं और सनी अपने अपने ग्रुप के लौंडे लेकर दत्तू पानवाले के खोमचे के आगे रात को आमने सामने आ गये। चूँकि मामला दिल्ली के लौंडों का है इसलिए पहले गालियों का दौर शुरू हो गया दोनों तरफ से माँ बहिन की जमकर गलियां बरसीं पर मेरे दोस्त मनोज ने गालियां देने से साफ़ रोकने की कोशिश की और बोला ये गलत है लड़ना है तो एक दुसरे को तोड़ दो पर गाली गलौच मत करो ।
क्रीमू – फिर क्या हुआ ? ( ऊंघते हुए )
संजू– होना क्या था ये सुनके सभी लौंडे हक्का बक्का रह गए । भाईसाब, हमारी इतनी बेइज़्ज़ती तो लाइफ मे कभी नहीं हुई थी। हमारी नहीं तो दिल्ली की ही कुछ इज़्ज़त रख लेता। दिल्ली का लौंडा होकर गालियां देने से मना कर दिया बस फिर क्या सबने आपस का झगड़ा भुला के मनोज को पीटना शुरू कर दिया और मार मार के बैंगनी रंग का बना दिया !
क्रीमू – बैंगनी ???
संजू – अरे वो क्या है ना मनोज अपने “आशुतोष “ भैया का दूर का रिश्तेदार है इसीलिए एक दम करिया है तो जब मारा तो ससुरा लाल की जगह बैंगनी हो गया।
क्रीमू – मनोज के घरवालों ने भी आपका ही साथ दिया ऐसा क्यों ??
संजू – अरे और क्या करते वो उनको भी तो अपनी लड़की की शादी करनी है अगर समाज में बात फैल जाती कि गुप्ता जी का लड़का गलियां नही देता है तो कौन उनकी लड़की से ब्याह करता फिर ? इस बाबत जब मनोज के पिताजी से हमारे संवादाता क्रीमू ने बात करने की कोशिश की तो उन्होंने साफ़ कर दिया कि उन्होंने अपने लड़के को जायदाद से बेदखल कर दिया एवं सम्बन्ध विच्छेद कर लिए हैं । खबर फैलने पर ” दिल्ली से हूँ बहन*द एसोसिएशन ” के तमाम सदस्यों में काफी रोष है और उन्होंने मनोज को दिल्ली सरकार से तड़ीपार करके संस्कारी बाबूजी आलोकनाथ के घर में शिफ्ट करने की मांग की है मौके की गंभीरता को समझते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री ( Gold medalist in Abusing P.M.) ने रोडीज़ वाले रघुराम और सोमनाथ भारती को मनोज की काउंसिलिंग का जिम्मा सौंपा है जिससे मनोज की हालत में पहले से सुधार हुआ है ।

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