वरिष्ठ नागरिको की पंक्ति में लग, जे-एन-यू छात्रो ने किये पैसे बदली- हैरान नहीं हुए लोग ।

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विमुद्रीकरण के कारण वरिष्ठ नागरिकों को कोई विशेष सुविधा न हो इसलिए शनिवार, 19 नवंबर के दिन को बैंकों से पैसे निकालने के लिए सिर्फ वरिष्ठ नागरिको के लिए ही तय करके रख दिया गया । जहाँ बैंकों के इस निर्णय का वरिष्ठ नागरिकों ने स्वागत किया, जवाहरलाल विश्वविद्यालय के युवा छात्रों ने भी इस मौके को उचित भुनाया ।

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सूत्रों की माने तो शनिवार को सारे हॉस्टल खाली मिले और गंगा ढाबा भी सूना रहा । सनद रहे की कक्षा और लाइब्रेरी में उपस्तिथि पे कोई विशेष असर नहीं पड़ा क्योंकि वह तो रोज़ ही सन्नाटा पसरा रहता हैं । दोनों ही स्थानों पे मकड़ियाँ जाले लगाते हुई पायी गयी । वही बैंक में लाइन लगाये हुए 62 वर्षीय अब्दुल्लाह ‘चे ग्वेवारा’ चट्टर्जी जोकि युगांडा की हब्सी सभ्यता का भारतीय बोली में योगदान के विषय में पिछले 35 वर्षों से अनुसंधान कर रहे हैं, उन्होंने अपनी परवरिशए व्याप्त मुफ्तखोरी,हक़रामखोरी का हवाला देते हुए बताया की यद्यपि इस तरह के कदम से वह आहात हैं लेकिन चुकी वह फोटोसिंथेसिस पे जीवित नहीं रह सकते, इसलिए जीवन में पहली बार लाइन में लगे हैं । उन्होंने यह भी बताया की इससे पहले उन्हें उनके कमरों में पाकिस्तानी एजेंट नियमित रूप से कैश में उनकी नारेबाजी की पेमेंट दे जाते थे ।

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उन्होंने यह भी बताया की पैसे की तंगी के कारण हॉस्टल में 1 भी MMS नहीं बनाया जा सकता है और साथ ही CD खरीदने में भी काफी समस्या आ रही हैं । उन्होंने साथ ही इस लाइन में मूलनिवासी, अल्पसंख्यक अथवा जेनयू के बुद्धिजीवियों के लिए अतिरिक्त कोटे के मांग करी । जब उन्हें बताया गया की वो पहले से ही सामान्य लाइन में नहीं लगे हैं अपितु वरिष्ठ नागरिकों की लाइन में खड़े हैं तो उन्होंने इसके लिए फासीवादी ताकतों को ज़िम्मेवार ठहराया । अंतिम सूचना प्राप्त होने तक जेएनयू के छात्र ने सड़क पे नाच-गान-ढपली बाजन करके पूरे 70 रुपये की आमदनी भी करली थी ।

Written By – @Muneem ji

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