राजनीती बदलने आये थे जी , बहुत बुरी तरह से बदली है; सदियों तक लोग याद करेंगे ऐसी राजनीती !!

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अरविन्द केजरीवाल एक ऐसा नाम है जो जनता के बीच से उठकर सीधा आसमान की ओर चल पड़ा, कब भ्रष्टाचार से मुद्दा खिसक कर मोदी पर जा अड़ा, RTI एक्टिविस्ट से गन्दी पॉलिटिक्स तक का सफ़र बहुत ही अनूठा रहा है ! राजनीती बदलने के मकसद से राजनीति में आये श्री अरविन्द केजरीवाल जी कब अपने अन्दर बसे सिद्धांतो को बदल बैठे पता ही नहीं चला, कब भ्रष्टाचार विरोधी तत्वों की बात करते करते मोदी-मोदी पर आये ये हालांकि पता चला और बहुत खूब पता चला, किस तरह से केजरीवाल जी ने राजनीती में बदलाव लाने की कोशिश ये आने वाले दिनों में होने वाले चुनावों के माध्यम से पता होने लगा है, कुछ कारण यह हैं कृपया ध्यान दें मित्रो

NEW DELHI, INDIA - OCTOBER 27: AAP Chief Arvind Kejriwal showing press release during the press conference on affidavit by government in Supreme Court on black money on October 27, 2014 in New Delhi, India. In its affidavit to the Supreme Court, the Indian government revealed the names of three individuals allegedly having Swiss bank account. Arvind Kejriwal accused government of selectively disclosing the names to protect some influential people. (Photo by Raj K Raj/Hindustan Times via Getty Images)

पंजाब में दलित उपमुख्यमंत्री दिल्ली के मुख्यमंत्री जो धोका दे कर लोगो को मुख्यमंत्री पद पर सुसज्जित हुए हैं का मानना है की किसी को भी मुख्यमंत्री पद उसकी जाती के अनुसार मिलना चाहिए नाकि काबिलियत के अनुसार, बात जितनी सीधी लगती है उतनी सीधी नहीं है , पंजाब में चुनाव होने वाले हैं और केजरीवाल जी बहुत धूर्त बुद्धि व्यक्ति हैं,उन्होंने देखा पंजाब में मेजोरिटी क्या है दलित कार्ड क्यूँ खेलना चाहते हैं केजरीवाल जी पंजाब में ? ये रहा कारण

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पंजाब में दलित प्रतिशत के हिसाब से केजरीवाल जी ने एक दलित को पंजाब का उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया, उपमुख्यमंत्री ही क्यूँ ? मुख्यमंत्री क्यों नहीं ? काबिलियत के अनुसार क्यूँ नहीं ? जाती को आगे लाकर ही क्यूँ ? जवाब स्पष्ट है पाताललोक वाली राजनीती, जमीनी स्तर पर पड़ी राजनीती, गिरी हुई राजनीती !

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पटेल जाती से जुडी राजनीती गुजरात में रसूखदार पटेल आरक्षण की मांग को लेकर सडको पर जब उतरे तो श्री केजरीवाल जी की धूर्त बुद्धि ने काम किया और सोच लिया की राजनीती दलितों से / पिछडो से परे पटेलो के काँधे बन्दूक रखकर भी की जा सकती है, उन्होंने जैसा सोचा बिलकुल वैसा ही किया पटेलो को आरक्षण दिलवाने में हार्दिक पटेल का हाथ थाम बैठे अब संघर्ष इ लगे हैं राजनीती चमकाने के लिए गुजरात में !

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मुस्लिम राजनीती मुस्लिमो को जहाँ हर पार्टी ने आज तक केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया वहीँ श्री केजरीवाल जी भी इन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने के मूड में दिखे और किया भ, मौके-२ पर जाली वाली टोपी पेहें पहुच जाना, आलरेडी बह्द्के मुस्लिमो को प्रधानमंत्री के खिलाफ और भड़काना लगा की केजरीवाल जी के जीवन का एकमात्र लक्ष्य रह गया है, वर्तमान में या बीते हुए समय में ऐसा कोई मुद्दा नहीं गया जिसे श्री केजरीवाल जी ने मुस्लिमो से ना जोड़ा हो, गन्दी गिरी हुई राजनीती और ज्यादा गिर गयी केजरीवाल जी के पधारने से !

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फौजी की मौत केजरीवाल जी टैलेंट के धनि हैं, वे जानते हैं किस मौके को किस प्रकार अपने वोटो में तब्दील करना है और कसी तरह हालातों फायदा उठाना है, हालत चाहे बाद से बदतर क्यूँ ना हों , अपने को तो केवल राजनीती करनी है वाले मूल मन्त्र के साथ श्री केजरीवाल जी आगे बढ़ रहे हैं और हत्या / मृत्यु / खुदखुशी जैसी घटनाओं को अवसर बनाकर अपने वोट सीधे करने में लगे हैं! हाल फ़िलहाल में ही नहीं हमेशा जब से श्री ने राजनीती में कदम रखा है तब से ही वे राजनीती जो गाँधी थी उसे और गन्दी करने पर उतारोऊ हो गए हैं , और कुछ हद्द अटक सफल भी हो जाते हैं !

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