राष्ट्र गान अनिवार्य किये जाने से सेक्युलरवादी हुए आहात, व्यक्त करी कड़ी प्रतिक्रिया ।

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व्यंग – Written by Muneem Ji

उच्चतम् न्यायालय द्वारा फिल्मो के मंचन से पहले राष्ट्र गान को आवश्यक बनाये जाने से खलबली सी मच गयी हैं । जहाँ इसे फासीवादी फैसला बताया जा रहा हैं तो वही कीच हल्कों में इसे अति राष्ट्रवादी कदम बताया जा रहा हैं । लोगो ने इस फैसले का विरोध जताते हुए यहाँ तक कहा की यह फैसला 1 हिन्दुआना साजिश हैं जिसके तहत देश का भगवाकरण किया जा रहा हैं । ममता बनर्जी ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय पे अत्याचार का द्योतक बताया और कहा की इसे उनकी पहचान को खतरा हैं । ममता ने ये भी मांग की पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश का राष्ट्र गान ‘आमार सोनार बांग्ला’ को भी अनिवार्य किया जाये । ऐसा इसलिए क्योंकि बंगाल में अब तक फिल्मों से पहले सिर्फ आमार सोनार बांग्ला ही बजता आया था ।

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वही समाजवादी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने मांग उठाई की पाकिस्तान का ‘कौमी तराना’, ‘पाक सरज़मी का निज़ाम’ उत्तर प्रदेश के हर सिनेमा घर में अनिवार्य किया जायेगा । उन्होंने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले में निहित अस्पष्टता को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्र गान अनिवार्य किया हैं, किस देश का, यह स्पष्ट नहीं किया हैं । इसलिए वो प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं को आहात नहीं करते हुए, कौमी तराना अनिवार्य करेंगे ।

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उन्होंने स्पष्ट बताया की देश भले रहे या न रहे ,धर्म निरपेक्षता बनी रहनी चाहिए । उन्होंने यह भी कहा की इस निर्णय के खिलाफ वह 1253835373734वीं बार देश में चौथा मोर्चा बनाएंगे और इसका कड़ा विरोध करेंगे ताकि ‘थाम्पदायिक ताकतों’ से लोहा लिया जा सके । इसके विपरीत राष्ट्रवादी ताकतों ने इसे अधूरे मन से लागू किया हुआ फैसला बताया । उन्होंने इसे अपूर्ण बताते हुए मांग उठायी की बीच फिल्मों में प्रभात फेरी और फिल्मों की समाप्ति पे मार्च पास्ट (कदम ताल) भी अनिवार्य किया जाए ।कुछ तत्वों ने ये भी मांग उठायी की फिल्मों की समाप्ति पे बीटिंग दी रिट्रीट के तर्ज पे समापन रखा जाए और सिनेमा मालिकों से झांकी निकलवाना भी अनिवार्य बनाया जाएं, यदि संभव होतो टैंक,मिसाइल तथा नवनिर्मित आयुध प्रदर्शन कर देश की सामरिक और युद्ध क्षमताओं का प्रदर्शन भी अनिवार्य किया जाए ।

फिल्मों का मंचन अब कैसे होगा और जनता इस फैसले से कैसे प्रभावित होती हैं ये देखने योग्य होगा और साथ ही देश के सेक्युलर वर्ग की प्रतिक्रिया भी देखने योग्य होगी ।

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