आरएसएस के स्वयंसेवक ने खोली इन्टरनेट पर हो रही वायरल विडियो की पोल!

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मैं एक स्वयंसेवक हूँ, बचपन से ही शाखा जाता रहा है, प्रथम वर्ष शिक्षित हूँ और एक नौजवान हूँ! इन्टरनेट पर आज से नहीं पिछले कई वर्षो से आरएसएस को बदनाम करने की साजिश की जा रही है परन्तु आजतक किसी पुख्ता तथ्य के साथ आरएसएस को बदनाम करने वाले सामने नहीं आये हैं! झूठ बोलना, सही को गलत तरीके से पेश करना ही एकमात्र तरीका इन असामाजिक तत्वों के पास रह गया है! असली दुनिया में ये कभी आरएसएस का विरोध तथ्यों के साथ नहीं कर पाए अब वर्तमान में इन्टरनेट इनके द्वारा एक माध्यम बना लिया गया है देश की सबसे पवित्र, राष्ट्रभक्ति में लीन, हर संकट की घडी  में सबसे आगे कड़ी रहने वाली आरएसएस को बदनाम करने के लिए!

मोहन भागवत के बयान को आधा-अधुरा, तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाले हर बार की तरह इस बार भी बेपर्दा हो गये हैं, म्हणत से बनाया प्रोपगंडा भष्ट हो गया है, दलाल मीडिया पर लोगों ने भरोसा करना पहले से ही छोड़ दिया था इसलिए लोग आजकल एक नहीं कई जगहों से बात की पुष्टि करके अपना कोई मत बनाते हैं! केवल मीडिया ही नहीं सोशल मीडिया पर भी ऐसे तत्व जो आरएसएस को बदनाम करने में लगे हैं असफल हुए और आगे भी होते रहेंगे! आरएसएस चीफ मोहन भागवत की विडियो की सच्चाई, ट्विटर हैंडल HMP न्यूज़ पर देखें!

इन्टरनेट पर वायरल हो रही एक विडियो जिसमे आरएसएस के कुछ स्वयंसेवक डंडे का प्रयोग करके खेल खेल रहे हैं, दूसरी विडियो जिसमे स्वयंसेवक भाग-दौड़ वाले खेल खेल रहे हैं की सच्चाई क्या है? खिल्ली उड़ाने के गंतव्य से कम्युनिस्ट प्रजाति विचारधारा वाले लोग इस विडियो को कई जगह शेयर कर रहे हैं और खिल्ली उड़ा रहे हैं! पहले विएओ देखें-

ऊपर की दो विडियो से पता चल जाता है जो लोग इन विडियो को शेयर कर रहे हैं या टो सच्चाई देखना नहीं चाहते या फिर लोगो को पता नहीं लगने देना चाहते, इन्टरनेट पर आप मखौल बना सकते हैं हमारा पर असली दुनिया में सामने भी नहीं आ सकते अपने फर्जी बयानों को लेकर, मैं शाखा जाता हूँ टो मुझे पता है सच्चाई क्या है!

शाखा एक जगह है जहाँ बिना किसी की उम्र देखे उसे वहां आने को कहा जाता है, चाहे वो 10 साल का बच्चा हो या 60 साल का वृद्ध, विडियो में जो शाखा है, देखने से पता लगता है वृद्ध शाखा है जिसमे एक-दो स्थानीय स्वयंसेवक युवक भी हैं, अब मैं आपको अपने क्षेत्र के अनुसार अगर बताऊँ तो सच्चाई ये है की सुबह-सुबह 6 बजे एक शाखा लगती है जो वृद्धो के लिए है, इसको प्रभात शाखा बोला जाता है, दुसरे संघस्थान पर एक शाखा लगती है जिसमे सब ही युवक होते हैं जो स्कूल में पढ़ते हैं, एक शाखा ऐसी लगती है जिसमे सब स्वयंसेवक नौकरी-पेशा या व्यापार वाले होते हैं! शाम को भी ऐसा ही है, शाम के समय कोई वृद्ध शाखा नहीं लगती!

मखौल आपने उड़ाया अच्छी बात है, पर कभी आकर तो देखो शाखा में, वाद-विवाद से लेकर जितनी आपकी शरीर की क्षमता हो लगाकर तो देखो सुबह सुबह, युवको के साथ शेर-बकरी या कबड्डी तो खेल कर देखो, कद्दू की बेल जैसे खेल खेलकर शायद आप कभी शाखा की ओर आयें ही ना, सोशल मीडिया पर ये सब कहना या मजाक उडाना बहुत आसान  है सच्चाई ये है शाखा में आकर आप कहीं देशभक्त ना बन जाएँ इसका आपको डर है 🙂

षड्यंत्र व् साजिशे चलती रहेंगी, जिसको क्षमता देखनी है वो शाखा में आये इन्टरनेट पर खिल्ली उड़ा रही विडियोज पर भरोसा करना पूर्ण रूप से सही नहीं है 🙂 ~एक स्वयंसेवक

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